गाँव की बहू और सरपंच की रात
सुरभि की उम्र अभी उन्नीस साल की थी, लेकिन उसका शरीर पूरी तरह से जवान और भरा-भरा था। गाँव में उसे देखने वालों की नज़रें ठहर जाती थीं-उसके भरे हुए स्तन, पतली कमर, और गोल नितंब जो साड़ी के नीचे से हिलते थे। उसकी शादी को दो साल हो चुके थे, लेकिन उसका पति शहर में काम करता था, साल में दो-तीन बार ही आता था। सुरभि की जवानी भूखी थी, और वह भूख कभी-कभी उसे गाँव के सरपंच के पास खींच ले जाती थी।







Write a comment ...